बंगाल चुनाव २०२६: हिंसा हुई तो जाएगी थानेदार की नौकरी! चुनाव आयोग ने दी संविधान की धारा ३११ के इस्तेमाल की चेतावनी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DG) के साथ हुई फुल बेंच की बैठक में प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। सूत्रों के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने एक चौंकाने वाला सवाल पूछा, “क्या चुनाव के समय जेल से कैदी भाग जाते हैं? हमें ऐसी खबरें मिली हैं। आप इसकी जांच कीजिए, अगर यह सच निकला तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे।”

थानेदारों पर गिरेगी गाज: आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी भी थाना क्षेत्र में चुनावी हिंसा होती है, तो संबंधित थाना प्रभारी (OC) को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि वे संविधान के अनुच्छेद ३११ का उपयोग करके कर्तव्यहीन पुलिस अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त (Dismiss) तक कर सकते हैं। २०२१ की चुनाव बाद की हिंसा का जिक्र करते हुए सीईसी ने कहा कि इस बार हिंसा की कोई भी जिम्मेदारी प्रशासन को ही उठानी होगी।

नए ऑब्जर्वर की नियुक्ति: प्रशासनिक निगरानी को और मजबूत करने के लिए आयोग ने सुब्रत गुप्ता को ‘इलेक्शन ऑब्जर्वर’ नियुक्त किया है। वे चुनाव से संबंधित किसी भी अधिकारी को बुला सकते हैं और निर्देश दे सकते हैं। मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि आयोग के आदेशों का कड़ाई से पालन हो। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि मतदान के एक दिन पहले तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने की सुविधा रहेगी, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *