ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर सवाल उठाए तो लगेगा भारी जुर्माना! SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने बंगाल में मतदाता सूची (SIR) मामले की सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश ने सख्त लहजे में कहा कि जो न्यायिक अधिकारी (Judicial Officers) इस प्रक्रिया में काम कर रहे हैं, उनकी ईमानदारी पर बिना वजह सवाल उठाने वालों पर ‘अनुकरणीय जुर्माना’ (exemplary fine) लगाया जाएगा।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां:

  • अधिकारियों का बचाव: सीजेआई ने कहा, “ज्यूडिशियल ऑफिसर्स काम कर रहे हैं, उन पर उंगली न उठाएं। आप सब कुछ नहीं जानते, हमें पता है कि कहां क्या हो रहा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के काम में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • वोटिंग का अधिकार: कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि यदि कोई व्यक्ति मतदान से ठीक एक दिन पहले भी वैध पाया जाता है, तो उसे वोट डालने की अनुमति दी जाएगी।
  • ट्रिब्यूनल का विकल्प: शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चाहें तो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ एक विशेष ट्रिब्यूनल बना सकते हैं, जहाँ न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के खिलाफ अपील की जा सकेगी।

अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों की मंशा पर संदेह जताया और मामले की अगली सुनवाई तक धैर्य बनाए रखने को कहा।

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