ममता बनर्जी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: “जरूरत पड़ी तो भीख मांगूंगी, पर लोगों को गैस दिलाऊंगी”, सब्सिडी से ज्यादा सप्लाई पर जोर!

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की लपटें अब बंगाल की रसोई तक पहुंच गई हैं। राज्य के हर जिले में गैस सिलेंडर के लिए लगी लंबी कतारों और जनता के बढ़ते गुस्से के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक निजी न्यूज चैनल (ABP Ananda) को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कई बड़े खुलासे किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार के लिए पैसा या सब्सिडी (Subsidy) फिलहाल प्राथमिकता नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती गैस की ‘सप्लाई चेन’ को बहाल करना है।

सब्सिडी पर क्या बोलीं मुख्यमंत्री? इंटरव्यू के दौरान जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या राज्य सरकार आम आदमी को राहत देने के लिए गैस पर सब्सिडी देने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। ममता बनर्जी ने कहा, “केंद्र सरकार ने पिछले चार सालों से हमारा फंड रोक रखा है, फिर भी हम सब्सिडी देने के लिए तैयार हैं। पैसा हमारे लिए कोई फैक्टर नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि अगर गैस की सप्लाई ही नहीं होगी, तो मैं सब्सिडी किसे दूंगी? प्राथमिकता यह है कि पहले सिलेंडर लोगों के घरों तक पहुंचे।”

सप्लाई चेन पर केंद्र को घेरा मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उनके गृह सचिव (Home Secretary) ने हाल ही में कंपनियों के साथ बैठक की थी, लेकिन वे लोग सप्लाई चेन को लेकर कोई ठोस भरोसा नहीं दे पाए। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं लोगों के लिए जरूरत पड़ी तो भीख मांगकर फंड जुटा लूंगी, लेकिन केंद्र को सप्लाई सुनिश्चित करनी होगी। मिड-डे मील, अस्पतालों का खाना और आम जनता का चूल्हा नहीं बुझना चाहिए।”

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश भर में एलपीजी की किल्लत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते कच्चे तेल के दामों ने हाहाकार मचा रखा है। बंगाल में कई जगहों पर गैस न मिलने के कारण विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि वे फंड की कमी को जनता की समस्या नहीं बनने देंगी, लेकिन केंद्र की आपूर्ति व्यवस्था में जो बड़ी दरार आई है, उसे भरना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। यह संकट न केवल रसोई तक सीमित है, बल्कि अब राज्य की राजनीति का भी मुख्य केंद्र बन गया है।

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