दुश्मन के होश उड़ा देगा ‘प्रोजेक्ट रणजीत’, भारतीय सेना को मिलने वाला है दुनिया का सबसे घातक टैंक!

भारतीय सेना की मारक क्षमता को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए ‘प्रोजेक्ट रणजीत’ पर काम तेज कर दिया गया है। दशकों पुराने रूसी मूल के T-72 ‘अजेय’ टैंकों की जगह अब सेना के बेड़े में ‘फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल’ (FRCV) शामिल होने जा रहे हैं। यह कदम न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि भविष्य की युद्ध चुनौतियों को देखते हुए एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक भी है।

क्या है ‘प्रोजेक्ट रणजीत’? रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2024 में इस प्रोजेक्ट को औपचारिक मंजूरी दी थी। इसे ‘मेक-I’ श्रेणी के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसमें सरकार प्रोटोटाइप विकसित करने की कुल लागत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा खुद वहन कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू रक्षा कंपनियों को बड़े पैमाने पर सैन्य प्लेटफॉर्म बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

मैदान-ए-जंग में नया सुल्तान: भारतीय सेना की जरूरतों के अनुसार, यह एक मध्यम श्रेणी का टैंक होगा जिसका वजन लगभग 55 टन रखा गया है। कम वजन और शक्तिशाली इंजन के कारण यह टैंक दुर्गम पहाड़ी इलाकों और लद्दाख जैसे ऊंचे क्षेत्रों में आसानी से आवाजाही कर सकेगा। इसमें चार चालक दल (Crew) के सदस्यों के बैठने की जगह होगी। अत्याधुनिक ऑटोलोडर सिस्टम से लैस इस टैंक में मैनुअल बैकअप की सुविधा भी होगी, ताकि आपात स्थिति में भी फायरिंग न रुके।

दिग्गज कंपनियां और तकनीक का संगम: प्रोजेक्ट रणजीत में भारत की दिग्गज कंपनियां जैसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T), टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स शामिल होने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। ये कंपनियां डीआरडीओ (DRDO) के साथ मिलकर टैंक के डिजाइन और घातक हथियारों पर काम करेंगी। वैश्विक मानकों को छूने के लिए सक्रिय सुरक्षा प्रणाली (Active Protection System) और उन्नत कवच के मामले में विदेशी सहयोग की भी संभावना है। बीईएमएल (BEML) लिमिटेड ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय तकनीकी भागीदारों के लिए रुचि पत्र जारी कर दिया है।

यह टैंक न केवल दुश्मन के टैंकों को तबाह करने में सक्षम होगा, बल्कि ड्रोन हमलों और एंटी-टانک मिसाइलों से खुद को बचाने की आधुनिक तकनीक से भी लैस होगा। भारतीय सेना का यह कायाकल्प आने वाले समय में दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन को भारत के पक्ष में मजबूती से खड़ा करेगा।

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