नेताजी की ‘अस्थियां’ लाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज! प्रधान न्यायाधीश ने दिया सख्त जवाब

जापान के रेन्कोजी मंदिर में रखी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ‘अस्थियों’ को भारत वापस लाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत की पीठ ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले भी कई याचिकाएं आ चुकी हैं और बार-बार एक ही मांग पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
यह याचिका नेताजी के परपोते आशीष रे ने दायर की थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ को बताया कि नेताजी की बेटी अनीता बोस पाफ खुद इस सुनवाई में वर्चुअली शामिल होने के लिए तैयार हैं। सिंघवी ने अदालत से अपील की कि वह केंद्र सरकार को अस्थियां वापस लाने का निर्देश दे। हालांकि, सीजेआई सूर्य कांत ने दोटूक शब्दों में कहा, “अगर नेताजी की बेटी खुद इस संबंध में याचिका दायर करती हैं, तभी हम भविष्य में इस पर विचार कर सकते हैं।”
नेताजी की अस्थियों का मुद्दा दशकों से विवादों और भावनाओं से घिरा रहा है। इससे पहले चंद्र बोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अस्थियां वापस लाने की मांग की थी। अदालत का मानना है कि इस विषय पर नेताजी के परिवार के सदस्यों के बीच एक राय नहीं है। साथ ही, चूंकि सीधे उत्तराधिकारी (बेटी अनीता बोस) इस याचिका में मुख्य याचिकाकर्ता नहीं थीं, इसलिए कोर्ट ने इसे सुनने योग्य नहीं माना। फिलहाल, नेताजी की अस्थियां जापान के मंदिर में ही रहेंगी, जिससे करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है।