न्यायपालिका पर ‘भ्रष्टाचार’ का आरोप बर्दाश्त नहीं! SC ने NCERT लेखकों से सभी सरकारी संबंध तोड़ने का दिया आदेश

भारतीय न्यायपालिका को “भ्रष्ट” बताने वाली कक्षा ८ की एनसीईआरटी (NCERT) की किताब पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को आदेश दिया कि वे उन विशेषज्ञों के साथ अपने संबंध तुरंत खत्म करें, जिन्होंने इस विवादित अध्याय को लिखा था। कोर्ट ने साफ किया कि प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार को भविष्य में किसी भी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

अदालत ने कहा कि हालांकि लेखकों की मंशा पर सीधे सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं, लेकिन स्कूली बच्चों के सामने न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश करना गंभीर मामला है। इससे पहले २६ फरवरी को ही सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब शिक्षा मंत्रालय को एक हफ्ते के भीतर एक नई कमेटी बनाने का निर्देश दिया गया है, जो स्कूली स्तर पर कानूनी पाठ्यक्रम को फिर से तैयार करेगी।

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