महंगाई का डबल डोज़! मार्च के अंत तक 20% महंगी हो सकती हैं दवाइयां, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संकट!

वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने अब भारत के फार्मा सेक्टर की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है, जिसका सीधा असर दवाओं की कीमतों पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मार्च के अंत तक दवाओं और संबंधित उत्पादों की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत की भारी वृद्धि हो सकती है।

भारत अपनी दवाओं के लिए जरूरी ‘एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स’ (API) का लगभग 15-16% हिस्सा यूरोप से आयात करता है, जो इसी समुद्री रास्ते से होकर आता है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से न केवल परिवहन महंगा हुआ है, बल्कि दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के दाम भी बढ़ गए हैं। कोटक सिक्योरिटीज के विशेषज्ञ अनिंद्य बनर्जी ने इस स्थिति को ‘इनऑर्गेनिक कोविड’ करार दिया है, क्योंकि यह महामारी के समय की तरह ही सप्लाई चेन को ध्वस्त कर रहा है।

ऑल फूड एंड ड्रग लाइसेंस होल्डर्स फाउंडेशन के अध्यक्ष अभय पांडे के अनुसार, कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत के कारण कफ सिरप, ग्लिसरीन और मास्क जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ना तय है। हालांकि कंपनियों के पास फिलहाल तीन महीने का बफर स्टॉक मौजूद है, लेकिन अगर हॉर्मुज का रास्ता जल्द नहीं खुला, तो उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है। इससे न केवल घरेलू बाजार में दवाओं की कमी होगी, बल्कि अमेरिका और अफ्रीका को होने वाले भारतीय निर्यात पर भी बुरा असर पड़ेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *