यूनुस का ‘पत्थर’ हटा, क्या तारिक रहमान के दौर में बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों के आएंगे अच्छे दिन?

५ अगस्त २०२४ को शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश ने जो उथल-पुथल देखी, वह अब एक नए मोड़ पर है। १७ फरवरी २०२६ को चुनाव जीतकर तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली है। इस बदलाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पिछले डेढ़ साल से प्रताड़ना झेल रहे बांग्लादेशी हिंदू अब चैन की सांस ले पाएंगे?
यूनुस शासन की कड़वी यादें: चटकीग्राम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुशलवरण चक्रवर्ती का कहना है कि मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल अल्पसंख्यकों के लिए किसी ‘भारी पत्थर’ (जगद्ददल पाथर) के समान था, जो उनके सीने पर रखा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस के शासन में ‘मब’ यानी भीड़ तंत्र का बोलबाला था, जिसने बुद्धिजीवियों और हिंदुओं को निशाना बनाया। टी-२० वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की भागीदारी न होने को भी उन्होंने यूनुस सरकार की कूटनीतिक विफलता बताया।
नई सरकार और सुरक्षा का वादा: तारिक रहमान के सत्ता संभालने के बाद, वर्तमान गृह मंत्री ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि देश में अब ‘मब जस्टिस’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रोफेसर चक्रवर्ती के अनुसार, यह एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि “हिटलर जैसी मानसिकता” के साथ अल्पसंख्यकों को खत्म करने की जो कोशिशें पिछले शासन में हुईं, वे अब शायद संभव न हों क्योंकि सोशल मीडिया के दौर में दुनिया की नजरें बांग्लादेश पर हैं।
राहत और चुनौतियां: हालांकि, यूनुस सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में कुछ अच्छे कदम भी उठाए थे, जैसे दुर्गा पूजा की छुट्टी बढ़ाना और हिंसा में मारे गए दीपू चंद्र दास के परिवार को वित्तीय सहायता देना। अल्पसंख्यक समुदाय चाहता है कि तारिक रहमान की सरकार इन अच्छे कामों को आगे बढ़ाए और गिरफ्तार किए गए हिंदू नेताओं, जैसे चिन्मय प्रभु की रिहाई सुनिश्चित करे।
भारत के साथ रिश्ते और कट्टरपंथ: चुनाव परिणामों से साफ है कि बांग्लादेश की जनता ने बड़े पैमाने पर कट्टरपंथियों को नकारा है। लेकिन सीमावर्ती इलाकों में अभी भी भारत विरोधी भावनाएं भड़काने की कोशिश जारी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के लिए सबसे बड़ी चुनौती देश के भीतर सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना और भारत के साथ बिगड़े हुए रिश्तों को सुधारना होगा। क्या बांग्लादेश वाकई शांति के रास्ते पर आगे बढ़ेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।