सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: नाम कटा तो ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाएं, लेकिन क्या 2026 में डाल पाएंगे वोट?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले वोटर लिस्ट को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य में कुल 87 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा सकते हैं। चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के तहत पहले ही 63 लाख नाम हटा दिए हैं और अब ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (विचाराधीन) श्रेणी के 24 लाख और नाम इस लिस्ट में जुड़ सकते हैं।
किसे मिलेगा वोट डालने का मौका? आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन 60 लाख नामों की जांच चल रही है, उनमें से जिनका निपटारा चुनाव से पहले हो जाएगा, वही वोट डाल पाएंगे। सोमवार को जारी होने वाली सप्लीमेंट्री लिस्ट में जिनके नाम के आगे ‘Deleted’ लिखा होगा, वे इस बार मतदान नहीं कर पाएंगे। ओडिशा और झारखंड से आए लगभग 700 न्यायिक अधिकारी दिन-रात इन दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।
ट्रिब्यूनल और कानूनी पेंच: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक अपीलीय ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। जिन लोगों का नाम कट गया है, वे वहां अपनी नागरिकता और दस्तावेजों के साथ अपील कर सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल में होने वाले मतदान (22, 26 और 30 अप्रैल) और 3 मई को आने वाले नतीजों तक यह कानूनी प्रक्रिया पूरी होना मुश्किल है। ऐसे में लाखों लोग इस बार अपनी सरकार चुनने के अधिकार से वंचित रह सकते हैं।