नंदीग्राम या भवानीपुर? चुनाव की तारीखों से पहले शुभेंदु अधिकारी ने खोला पत्ता!

पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजने के ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पसंदीदा सीट को लेकर बड़ा बयान दिया है। पिछले कई महीनों से भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनौती देने के संकेतों के बीच, शुभेंदु ने अब नंदीग्राम को अपनी प्राथमिकता बताया है। रविवार को चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ घंटे पहले उन्होंने स्पष्ट किया कि एक अनुशासित सिपाही के रूप में वह पार्टी के फैसले को मानेंगे, लेकिन उनका दिल नंदीग्राम में बसता है।

शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, “भाजपा में सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं, यहाँ तृणमूल की तरह बुआ-भतीजे की मनमानी नहीं चलती। अगर पार्टी मुझे चुनाव न लड़ने को कहे तो भी मैं तैयार हूँ।” उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा, “लेकिन यदि मेरी पसंद पूछी जाए, तो मैं नंदीग्राम से ही लड़ना चाहूंगा। नंदीग्राम मेरी कर्मभूमि और आध्यात्मिक संपत्ति है। हालांकि, मैं नंदीग्राम को बरकरार रखते हुए किसी दूसरी सीट (भवानीपुर) के बारे में सोच सकता हूँ।” उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में ‘दो सीटों’ वाली चर्चा को हवा दे दी है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने शुभेंदु के इस बयान पर तीखा पलटवार किया है। टीएमसी नेता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “शुभेंदु को अपनी हार का डर सता रहा है। भवानीपुर में ममता दीदी को हराने का दावा करने वाले अब नंदीग्राम की शरण ले रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि इस बार बंगाल की जनता उन्हें करारा जवाब देगी।” टीएमसी का दावा है कि शुभेंदु अब भाजपा के भीतर भी अलग-थलग पड़ चुके हैं और अपनी टिकट बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

बंगाल की २९४ सीटों पर होने वाले इस महामुकाबले में शुभेंदु की भूमिका बेहद अहम है। २०२१ में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को मात दी थी, और अब २०२६ में वह उसी इतिहास को दोहराना चाहते हैं या भवानीपुर के गढ़ में सेंध लगाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

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