बंगाल चुनाव में हिंसा रोकने के लिए चुनाव आयोग का ‘प्लान-24’! 123 कंपनियों की तैनाती और सख्त निगरानी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना चुनाव आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया कि इस बार बंगाल में न तो ‘पैसों का खेल’ चलेगा और न ही ‘हिंसा’ की कोई जगह होगी। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने एक व्यापक सुरक्षा खाका तैयार किया है।
आचार संहिता और सुरक्षा के कड़े इंतजाम: चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बंगाल में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। ज्ञानेश कुमार ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अब से हर गतिविधि आयोग के दायरे में होगी। बंगाल की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनाव को ८ के बजाय केवल २ चरणों में कराने का फैसला लिया गया है ताकि सुरक्षा बलों का बेहतर इस्तेमाल हो सके।
पारदर्शिता के लिए नए नियम:
- हर २ घंटे में अपडेट: मतदान के दिन हर दो घंटे में वोटिंग प्रतिशत की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। वोटिंग खत्म होते ही फॉर्म 17C के जरिए अंतिम डेटा तुरंत साझा किया जाएगा।
- अधिकारियों पर नजर: पिछले चुनावों में हिंसा में शामिल रहे पुलिस अधिकारियों की सूची मांगी गई है। उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारियों और एसपी को पूरी तरह निष्पक्ष रहने का निर्देश दिया गया है।
- VVPAT की पर्चियों की गिनती: यदि EVM और फॉर्म 17C के आंकड़ों में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो तुरंत VVPAT पर्चियों की गिनती की जाएगी। हारने वाले उम्मीदवार निर्धारित शुल्क देकर दोबारा जांच की मांग भी कर सकते हैं।
ECI-Net सिस्टम: चुनाव आयोग ने ‘ECI-Net’ सिस्टम पेश किया है, जिसके जरिए मतगणना के ७२ घंटों के भीतर चुनाव से जुड़े सभी आंकड़े उपलब्ध होंगे। आयोग ने २४ प्रवर्तन एजेंसियों (Enforcement Agencies) को अलर्ट पर रखा है ताकि चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने या डराने की किसी भी कोशिश को नाकाम किया जा सके। ४ मई को आने वाले नतीजों से पहले, आयोग की यह ‘कवच’ नीति बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।