23 और 29 अप्रैल को फैसला करेगी बंगाल की जनता, शमिक बोले- ‘हिंसा मुक्त चुनाव ही हमारी प्राथमिकता’!

राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने रविवार शाम को पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के लिए चुनावी बिगुल फूंक दिया है। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाली बेंच ने घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव केवल दो चरणों में संपन्न होंगे। मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।
चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने आयोग के फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन ‘एसआईआर’ (SIR) के मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किया। शमिक ने स्पष्ट रूप से कहा, “एसआईआर अभी तक पूरा नहीं हुआ है। और जब तक एसआईआर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, हम चुनाव नहीं होने देंगे। यह हमारी पुरानी मांग है और हम इस पर कायम हैं।”
बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास हमेशा चिंता का विषय रहा है। ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बार-बार ‘भयमुक्त’ वातावरण में चुनाव कराने का आश्वासन दिया। इसी संदर्भ में शमिक भट्टाचार्य ने भी चुनाव आयोग से अपील की है कि राज्य में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा, “हम दो चरणों के चुनाव का स्वागत करते हैं, लेकिन आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदाता बिना किसी डर के बूथ तक पहुंच सकें।”
गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव आठ चरणों में हुए थे, लेकिन इस बार इसे घटाकर केवल दो कर दिया गया है। पहले चरण में 152 सीटों पर और दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होगा। आयोग के सूत्रों के अनुसार, कम चरणों के बावजूद सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी जाएगी। बंगाल की संवेदनशीलता को देखते हुए भारी संख्या में केंद्रीय बलों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी ताकि निष्पक्ष चुनाव संपन्न हो सकें। भाजपा अब एसआईआर और सुरक्षा के मुद्दे को लेकर चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है।