‘बीजेपी का गुलाम है चुनाव आयोग!’ बंगाल में 2 चरणों में वोटिंग पर भड़की टीएमसी

रविवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। आयोग ने इस बार केवल दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में चुनाव कराने का फैसला लिया है। जहां भाजपा ने इस निर्णय का स्वागत किया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC), वामदल और कांग्रेस ने चुनाव आयोग की ‘तटस्थता’ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

TMC प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने तीखा हमला करते हुए आयोग को ‘भाजपा का गुलाम’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। चक्रवर्ती ने कहा, “2021 में कोविड के दौरान 8 चरणों में चुनाव हुए थे क्योंकि तब बीजेपी को फायदा दिख रहा था, अब उनके दबाव में इसे 2 चरणों में समेट दिया गया।” उन्होंने ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया के तहत 60 लाख मतदाताओं के नाम ‘विचाराधीन’ रखने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।

वाम नेता सुजन चक्रवर्ती और कांग्रेस के शुभंकर सरकार ने भी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया है। सुजन चक्रवर्ती ने सवाल किया कि अगर किसी सीट पर हार-जीत का अंतर 5 हजार हो और वहां 12 हजार वोटर्स के नाम ‘पेंडिंग’ हों, तो आयोग क्या स्पष्टीकरण देगा? कांग्रेस ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इसे परिवर्तन की शुरुआत बताया और वादा किया कि सत्ता में आते ही सरकारी कर्मचारियों को सातवां वेतन आयोग और महिलाओं को 3000 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही बंगाल की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है।

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