“पिता से झगड़ा हो तो क्या पड़ोसी को पापा कहोगे?” पाला बदलने वालों पर शतद्रु घोष का करारा तंज

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए वामपंथियों (CPIM) की पहली सूची ने सबको चौंका दिया है। कसबा निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी का चेहरा रहे युवा नेता शतद्रु घोष (Shatarup Ghosh) इस बार चुनावी मैदान में नहीं हैं। लगातार तीन बार हार का सामना करने वाले शतद्रु का नाम सूची से गायब होने पर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हार और जिम्मेदारी पर बेबाक बयान: टिकट न मिलने के सवाल पर शतद्रु ने कहा, “CPIM किसी एक नेता के भरोसे चलने वाली पार्टी नहीं है।” कसबा से अन्य संभावित उम्मीदवारों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने आत्ममंथन के लहजे में कहा, “प्रतीकुर एक जुझारू लड़का है, लेकिन वह इतना बड़ा नेता नहीं है कि जीत सुनिश्चित कर सके। पहले उसकी जमानत भी जब्त हो चुकी है। यह उसकी व्यक्तिगत हार नहीं बल्कि हमारी पार्टी की विफलता है। सच तो यह है कि अगर इस बार मैं भी खड़ा होता, तो भी जीत नहीं पाता।”

दलबदलुओं पर ‘पिता-चाचा’ वाला हमला: शतद्रु घोष अपने तीखे हमलों के लिए जाने जाते हैं। पार्टी छोड़कर दूसरी विचारधारा में शामिल होने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “परिवार में अगर पिता से अनबन हो जाए, तो कोई पड़ोस के अंकल को पिता कहकर नहीं बुलाता। अगर कोई ऐसा कर रहा है, तो निश्चित रूप से इसके पीछे कोई गहरी साजिश या कहानी है।” उनका यह बयान उन नेताओं की ओर इशारा था जो हाल के दिनों में वामपंथ छोड़कर सत्ता पक्ष या भाजपा में शामिल हुए हैं।

2011 से चुनावी राजनीति में सक्रिय शतद्रु भले ही इस बार खुद उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन वह पूरे बंगाल में पार्टी प्रत्याशियों के लिए जमकर प्रचार कर रहे हैं। क्या यह उनकी सक्रिय राजनीति से दूरी है या पार्टी की नई रणनीति? यह तो वक्त ही बताएगा।

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