सुप्रीम कोर्ट में आज तय होगा बंगाल का सियासी भविष्य! ‘ग्रीन फाइल’ और PNR विवाद पर सबकी नजर

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और देश की संघीय व्यवस्था के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हो सकता है। आई-पैक (I-PAC) कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान हुए हंगामे का मामला आज सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है। जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। आज अदालत यह तय कर सकती है कि क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की आवश्यकता है।

ED के गंभीर आरोप: ED ने अपनी याचिका में सनसनीखेज आरोप लगाया है कि 8 जनवरी को प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी के दौरान राज्य प्रशासन ने जांच में बाधा डाली। जांच एजेंसी का दावा है कि छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण और दस्तावेज गायब कर दिए गए। यहाँ तक कि एक ED अधिकारी का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया। केंद्र का तर्क है कि यह केंद्रीय एजेंसियों को काम करने से रोकने की एक सोची-समझ़ी साजिश है।

ममता बनर्जी का बचाव: दूसरी ओर, बंगाल सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। राज्य का कहना है कि मुख्यमंत्री वहां केवल अपनी पार्टी की चुनावी रणनीतियों से जुड़ी गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए गई थीं। तृणमूल कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है। गौरतलब है कि यह पूरी छापेमारी 2,700 करोड़ रुपये के कोयला तस्करी मामले से जुड़ी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उस रात के सभी सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। आज की सुनवाई यह साफ कर देगी कि क्या बंगाल पुलिस और प्रशासन को केंद्रीय जांच के घेरे में लाया जाएगा।

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