वोटिंग का अधिकार मिलेगा या नहीं? चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर तृणमूल ने उठाए सवाल

कोलकाता: बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है, लेकिन लाखों मतदाताओं के लिए स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम ‘विचाराधीन’ (SIR) श्रेणी में रखे गए थे। इनमें से केवल 21 लाख नामों का निपटारा अब तक हो पाया है, जबकि 39 लाख लोगों का भविष्य अब भी अधर में लटका हुआ है।
सप्लीमेंट्री लिस्ट का इंतजार: चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता के अनुसार, न्यायिक अधिकारी डेटा की जांच कर रहे हैं और उम्मीद है कि इस शुक्रवार या शनिवार तक पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर दी जाएगी। हालांकि, 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इतने कम समय में बाकी 39 लाख नामों की जांच पूरी करना आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती है।
राजनीतिक बवाल: तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आयोग को घेरना शुरू कर दिया है। राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पूछा है कि क्या उन लोगों को ट्रिब्यूनल जाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा जिनके नाम सूची से हटा दिए जाएंगे? उन्होंने आयोग और अदालत के बीच समन्वय की कमी पर भी चिंता जताई है। यदि ये मतदाता वोट नहीं दे पाते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा झटका होगा। फिलहाल, सबकी नजरें इसी हफ्ते आने वाली नई सूची पर टिकी हैं।