नेतृत्व विहीन हुआ ईरान? ट्रम्प बोले— “पता नहीं अब किससे बात करें”, पश्चिमी एशिया में महायुद्ध के संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर एक बेहद सख्त संदेश जारी किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अमेरिका का यह अभियान जल्द खत्म होने वाला नहीं है। ट्रम्प के अनुसार, उनका लक्ष्य केवल ईरान को चोट पहुँचाना नहीं, बल्कि उसे ऐसी “स्थायी क्षति” देना है जिससे भविष्य में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को फिर से इस खतरे का सामना न करना पड़े। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य शक्ति को इतना कमजोर कर दिया है कि उसे दोबारा खड़ा होने में कम से कम 10 साल लगेंगे।

ट्रम्प ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने समय रहते कदम नहीं उठाया होता, तो ईरान महज दो हफ्तों के भीतर परमाणु हथियार हासिल कर लेता। ट्रम्प ने कहा, “वे परमाणु शक्ति बनने के बेहद करीब थे। एक बार उनके पास बम आ जाता, तो फिर बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बचती।” उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु संपन्न राष्ट्र नहीं बनने दिया जाएगा। युद्ध की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए ट्रम्प ने कहा कि नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर रहे हैं।

युद्ध के समापन की समयसीमा पर ट्रम्प ने मिश्रित संकेत दिए। उन्होंने इसे “कुछ हफ्तों का छोटा मिशन” बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि “हम अभी वापस जाने के लिए तैयार नहीं हैं।” सबसे दिलचस्प बात यह रही कि ट्रम्प ने ईरान के नेतृत्व संकट पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि हालिया हमलों में ईरान के कई शीर्ष कमांडरों के मारे जाने के बाद अब वाशिंगटन को यह नहीं पता कि कूटनीतिक बातचीत के लिए किससे संपर्क किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने हॉरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में सहयोग न करने के लिए नाटो (NATO) देशों को “मूर्ख” बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि वे वियतनाम जैसी लंबी जंग से नहीं डरते और चीन के साथ होने वाली बैठक को टालकर उन्होंने साबित कर दिया है कि ईरान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *