घुसपैठिए और वोटर लिस्ट पर भड़कीं दीदी, आरएसएस करीबी को लेकर दिया बड़ा बयान; सियासी हलचल तेज

चुनाव की दहलीज पर खड़ी बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर अपने पुराने आक्रामक अंदाज में नजर आईं। उम्मीदवारों की सूची घोषित करने के दौरान उन्होंने न केवल विरोधियों पर कटाक्ष किए, बल्कि अपने ‘टॉन्सिल’ वाले बयान से एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। ममता के भाषण में तंज, आत्मविश्वास और केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा आक्रोश साफ झलका, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्या है ‘टॉन्सिल’ विवाद? ममता बनर्जी ने आरएसएस के करीबी एक व्यक्ति पर निशाना साधते हुए कहा कि हरियाणा से आया कोई व्यक्ति राज्य के प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का मुख्य सचिव कौन होगा, यह भी बाहर से तय किया जा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, “उन्हें अपने टॉन्सिल का इलाज कराना चाहिए।” उन्होंने बीजेपी के खिलाफ कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से ‘दम घोंटने’ का आह्वान किया, लेकिन साथ ही लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की सलाह भी दी।

2026 का टारगेट और केंद्र पर हमला ममता ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि “दिल्ली का लड्डू कभी नहीं जीतेगा” और दावा किया कि 2026 के चुनाव में उनकी पार्टी 226 सीटें जीतेगी। उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘सुपर इमरजेंसी’ लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। गैस की बढ़ती कीमतों और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञापनों पर ज्यादा और काम पर कम खर्च हो रहा है।

घुसपैठ और मतदाता सूची पर रुख मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची से मतुआ, राजवंशी और अल्पसंख्यकों के नाम हटाए जाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंगाल में कोई घुसपैठिया नहीं है। उनके अनुसार, असली घुसपैठिए वे हैं जो बाहर से आकर वोट लूटने की कोशिश करते हैं। ममता के इन तीखे तेवरों से साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल का चुनावी दंगल और भी दिलचस्प और आक्रामक होने वाला है।

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