9 अप्रैल की वोटिंग से पहले असम में बड़ा खेल! भूपेन बोरा के बाद अब प्रद्युत ने छोड़ा हाथ का साथ; बीजेपी की लहर

असम में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का किला ढहता नजर आ रहा है। असम के दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले प्रद्युत का यह कदम असम की राजनीति में कांग्रेस के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
“सम्मान सर्वोपरि है”: प्रद्युत बोरदोलोई बीजेपी में शामिल होने के बाद बोरदोलोई ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मेरे लिए टिकट पाना जीवन-मरण का प्रश्न नहीं था। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण था अपना सिर ऊंचा रखना। कांग्रेस पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया, लेकिन वहां लगातार अपमान हो रहा था। मेरे सांसद कार्यकाल के अभी तीन साल बाकी हैं, मैं चाहता तो कुर्सी से चिपका रह सकता था, लेकिन मैंने स्वाभिमान के लिए काम करने का फैसला किया।” उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष को उजागर कर दिया है।
बिखरता कुनबा: संकट में कांग्रेस प्रद्युत बोरदोलोई से पहले असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। राज्य के नेताओं के साथ मतभेदों के कारण बोरा का जाना और अब प्रद्युत का बीजेपी में शामिल होना यह दर्शाता है कि असम में कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह विफल हो रहा है। कांग्रेस के उत्तर-पूर्व प्रभारी सुब्रत बोरा ने इसे ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया है।
हिमंत का ‘मास्टरस्ट्रोक’ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा चुनाव से पहले विरोधियों को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रद्युत जैसे अनुभवी नेता के आने से बीजेपी की स्थिति और मजबूत हुई है। अब 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इस भारी नुकसान की भरपाई कर पाएगी या असम में बीजेपी का एकतरफा राज होगा।