“योग्य अफसरों का अपमान कर रही बीजेपी”, तबादलों पर भड़कीं शशी पांजा; बीजेपी ने आरजी कर कांड का दिया हवाला

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव 2026 से पहले निर्वाचन आयोग (Election Commission) फुल एक्शन मोड में नजर आ रहा है। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। डीजीपी और पांच पुलिस कमिश्नरों को हटाने के बाद अब 13 जिलाधिकारियों (DM) और 5 महत्वपूर्ण रेंजों के डीआईजी (DIG) का तबादला कर दिया गया है। बुधवार को जारी अधिसूचना ने बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है।

अधिकारियों की नई सूची और रदबदल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, रायगंज के डीआईजी राठौर अमित कुमार भरत, मुर्शिदाबाद के डीआईजी अजीत सिंह यादव और वर्धमान के डीआईजी श्रीहरि पांडे को हटा दिया गया है। इसके अलावा प्रेसीडेंसी रेंज के डीआईजी कंकड़ प्रसाद बाउरी और जलपाईगुड़ी रेंज की डीआईजी अंजलि सिंह का भी तबादला किया गया है। उत्तर और दक्षिण कोलकाता, मालदा, नदिया और दार्जिलिंग जैसे महत्वपूर्ण जिलों के डीएम भी बदल दिए गए हैं। नए नियुक्त अधिकारियों में रणधीर कुमार और स्मिता पांडे जैसे अनुभवी नाम शामिल हैं, जिन्होंने पहले रोल ऑब्जर्वर के रूप में आयोग के साथ काम किया है।

सत्ता पक्ष और विपक्ष में छिड़ी जुबानी जंग इन तबादलों को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। राज्य की निवर्तमान मंत्री शशी पांजा ने कहा, “बीजेपी अब केंद्रीय संस्थानों के बाद बंगाल के आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के बीच विभाजन पैदा कर रही है। यह अधिकारियों का अपमान है।” दूसरी ओर, बीजेपी के प्रवक्ता देवजीत सरकार ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि ये अधिकारी सरकार के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने आरजी कर अस्पताल मामले में सबूतों से छेड़छाड़ का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे फेरबदल निष्पक्ष चुनाव के लिए बेहद जरूरी हैं।

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