79,000 अरब का कर्ज और अफगानिस्तान से जंग! बर्बादी की कगार पर खड़ा है भारत का पड़ोसी देश

साल 2026 पाकिस्तान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। देश इस समय अपनी सबसे भीषण आर्थिक और राजनीतिक त्रासदी से गुजर रहा है। एक तरफ अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल की सप्लाई ठप है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ सीमा पर छिड़ी जंग ने आग में घी डालने का काम किया है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश का कुल कर्ज 79,322 बिलियन पाकिस्तानी रुपये के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

हालात इतने खराब हैं कि पाकिस्तान में सरकारी वाहनों के इस्तेमाल में 60% की कटौती की गई है और मंत्रियों के वेतन भी काट लिए गए हैं। महंगाई दर 30% तक पहुंचने की आशंका है, जिससे आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो पाकिस्तान की जीडीपी पूरी तरह चरमरा जाएगी।

अफगानिस्तान के साथ युद्ध के कारण तोरखम और चमन जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग बंद हैं। इसके चलते आटा, दाल और चावल जैसी जरूरी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। कोयले की कमी से सीमेंट और अन्य उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। 1958 से अब तक 26 बार आईएमएफ (IMF) से बेलआउट पैकेज लेने के बावजूद पाकिस्तान खुद को दिवालिया होने से नहीं बचा पा रहा है। आज पाकिस्तान की जनता दाने-दाने को मोहताज है और देश एक गहरे अंधेरे में डूबता नजर आ रहा है।


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