भवानीपुर के बाद अब शिवपुर में दांव पर रुद्रनील घोष की किस्मत! क्या इस बार खिलेगा कमल?

दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर से सीधे हावड़ा का शिवपुर—बीजेपी नेता और मशहूर अभिनेता रुद्रनील घोष की किस्मत अब एक नए ‘पुर’ में तय होने वाली है। 2021 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले रुद्रनील सोशल मीडिया पर अपनी कविताओं और व्यंग्य के जरिए ममता सरकार को घेरने में माहिर माने जाते हैं। हालांकि, चुनावी राजनीति में उन्हें अब भी पहली जीत का इंतजार है। पिछले चुनाव में भवानीपुर से शोभनदेव चट्टोपाध्याय के खिलाफ उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार शिवपुर की गलियां उनके लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई हैं।
मैदान-ए-जंग: शिवपुर का सियासी समीकरण रुद्रनील घोष इस बार अपने ‘होम ग्राउंड’ शिवपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने इसे अपना ‘ऑक्सीजन सिलेंडर’ करार देते हुए कहा कि यहाँ के लोग उनके लिए केवल वोटर नहीं, बल्कि काका-काकी और बड़े भाई जैसे हैं। उनके सामने टीएमसी ने बाली के पूर्व विधायक डॉक्टर राणा चटर्जी को उतारा है। पिछले चुनाव में बाली से जीत दर्ज करने वाले राणा को इस बार खेल राज्य मंत्री मनोज तिवारी की जगह टिकट दिया गया है। साथ ही, वाम गठबंधन की ओर से फॉरवर्ड ब्लॉक के जगन्नाथ भट्टाचार्य भी मैदान में हैं, जो मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं।
जटू लाहिड़ी की विरासत और आंकड़ों का गणित शिवपुर का इतिहास जटू लाहिड़ी के बिना अधूरा है, जो यहाँ से पांच बार विधायक रहे। 2023 में उनके निधन के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है। आंकड़ों की बात करें तो शिवपुर पिछले डेढ़ दशक से टीएमसी का गढ़ रहा है। 2021 के चुनाव में मनोज तिवारी ने यहाँ 50% से अधिक वोट हासिल किए थे। हालांकि, बीजेपी के लिए राहत की बात यह है कि पिछले पांच वर्षों में यहाँ पार्टी का वोट बैंक 25% तक बढ़ा है।
लोकसभा 2024 के नतीजे और चुनौतियां 2024 के लोकसभा चुनावों के रुझान बताते हैं कि शिवपुर विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी के प्रसून बनर्जी को लगभग 14,000 वोटों की बढ़त मिली थी। बीजेपी उम्मीदवार को यहाँ 65 हजार से अधिक वोट मिले थे, जबकि वामपंथियों के खाते में 26 हजार वोट गए थे। रुद्रनील की जीत का रास्ता इसी वामपंथी वोट बैंक में सेंधमारी और टीएमसी के कोर वोट बैंक में कम से कम 10% की गिरावट लाने पर निर्भर करता है।
क्या है जनता का मूड? 15 साल की सत्ता के बाद शिवपुर में सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) साफ देखी जा रही है। जल निकासी की समस्या, खराब सड़कें और बेरोजगारी यहाँ के मुख्य मुद्दे हैं। विपक्ष का आरोप है कि विधायक के तौर पर मनोज तिवारी ने क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं किया। क्या रुद्रनील इन स्थानीय मुद्दों को वोटों में तब्दील कर पाएंगे या डॉक्टर राणा का अनुभव भारी पड़ेगा? मुकाबला बेहद कड़ा है।