16 साल बाद चीन में गूगल की वापसी! लेकिन सर्च इंजन नहीं, इस ‘खास चीज’ के लिए हाथ मिलाया

साल 2010 में चीन के कड़े नियमों के कारण अपना कारोबार समेटने वाला गूगल, पूरे 16 साल बाद एक बार फिर चीनी जमीन पर लौट आया है। हालांकि, इस बार गूगल अपनी सेवाओं जैसे सर्च इंजन या यूट्यूब के लिए नहीं, बल्कि चीन की उन्नत ‘कूलिंग टेक्नोलॉजी’ का लाभ उठाने के लिए वहां पहुंचा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, गूगल अपने भविष्य के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने के लिए चीनी कंपनी ‘एनविकूल’ (Envicool) के साथ हाथ मिला रहा है।

डेटा सेंटर्स की ‘गर्मी’ का इलाज गूगल के पास दुनिया भर में विशाल डेटा सेंटर्स हैं जहाँ हजारों सर्वर दिन-रात काम करते हैं। AI प्रोसेसिंग के दौरान ये सर्वर अत्यधिक गर्म हो जाते हैं, जिन्हें सामान्य एयर कंडीशनिंग से ठंडा रखना मुमकिन नहीं है। इसके लिए ‘लिक्विड कूलिंग’ तकनीक की जरूरत होती है। इस तकनीक में पानी और रसायनों के मिश्रण (Cooling Agent) को पाइप के जरिए मशीनों तक पहुँचाया जाता है ताकि वे सुचारू रूप से काम कर सकें।

चीन और ताइवान के बीच गुप्त कड़ियां बताया जा रहा है कि गूगल की ताइवान स्थित प्रोक्योरमेंट टीम ने चीनी कंपनी एनविकूल के अधिकारियों से मुलाकात की है। एनविकूल का बाजार मूल्य लगभग 14 बिलियन डॉलर है। कंपनी ने हाल ही में एक इवेंट में खुलासा किया कि उन्होंने गूगल के सर्वर के लिए एक विशेष कूलिंग एजेंट विकसित किया है। गूगल अब एक और चीनी कंपनी की तलाश में है ताकि अपनी सप्लाई चेन को मजबूत कर सके।

अरबों डॉलर का है यह खेल जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लिक्विड कूलिंग एजेंट की मांग 2026 तक दोगुनी होकर 17 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। जहां एक तरफ अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी युद्ध जारी है, वहीं गूगल का अपनी कोर AI सेवाओं के लिए चीन पर निर्भर होना वैश्विक बाजार में चर्चा का विषय बन गया है।

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