एलपीजी ग्राहकों के लिए बड़ी खबर! अब १४.२ किलो की जगह सिलेंडर में मिल सकती है केवल १० किलो गैस

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली एलपीजी आपूर्ति बाधित हुई है। इस संकट से निपटने के लिए देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अब राशनिंग या गैस की मात्रा घटाने पर विचार कर रही हैं। खबरों के मुताबिक, अब आपके रसोई घर में आने वाले १४.२ किलो के सिलेंडर में गैस की मात्रा कम की जा सकती है।
क्या है नया प्रस्ताव? ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी की सीमित स्टॉक को देखते हुए कंपनियां १४.२ किलो वाले सिलेंडर में केवल १० किलो गैस रिफिल करने की योजना बना रही हैं। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का ६०% आयात करता है और वर्तमान में कई एलपीजी कैरियर फारस की खाड़ी में क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं। भारत में रोजाना ९३,५०० टन एलपीजी की खपत होती है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
- समान वितरण: १० किलो गैस देने से अधिक परिवारों तक सिलेंडर पहुँचाया जा सकेगा, जिससे किल्लत की स्थिति नहीं बनेगी।
- कीमत: अगर गैस की मात्रा घटाई जाती है, तो सिलेंडर की कीमत भी उसी अनुपात में कम कर दी जाएगी।
- अवधि: आमतौर पर १४.२ किलो का सिलेंडर ३५-४० दिन चलता है, लेकिन १० किलो की रिफिल केवल एक महीने तक ही चलेगी।
कंपनियों का मानना है कि जब तक आयात की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक स्टॉक को बचाए रखना और सबको गैस उपलब्ध कराना ही प्राथमिकता है।