ईरान युद्ध का साया: कल मुख्यमंत्रियों के साथ पीएम मोदी की इमरजेंसी मीटिंग, क्या होने वाला है बड़ा फैसला?

पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग की आहट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस वैश्विक संकट के बीच भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी शुक्रवार को देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक करने जा रहे हैं। शाम ६:३० बजे होने वाली इस बैठक को लेकर कयासों का बाजार गर्म है कि क्या सरकार किसी बड़े और कड़े फैसले की तैयारी में है।

रणनीतिक चर्चा और सुरक्षा: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सूत्रों के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा पश्चिम एशिया के संघर्ष से भारत पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा करना है। युद्ध की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और एलपीजी गैस की आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। सप्लाई चेन को टूटने से बचाने और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए प्रधानमंत्री मुख्यमंत्रियों के साथ ‘रोडमैप’ साझा करेंगे।

प्रवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि: ईरान और आसपास के देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। संकट की स्थिति में उन्हें सुरक्षित वापस लाने या उनकी मदद करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर चर्चा होगी। पीएम मोदी ‘टीम इंडिया’ की भावना पर जोर देंगे, जैसा कि कोविड काल के दौरान देखा गया था।

चुनाव और प्रोटोकॉल: बैठक में उन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे जहाँ वर्तमान में चुनाव प्रक्रिया चल रही है। आदर्श चुनाव आचार संहिता के कारण, इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ कैबिनेट सचिवालय अलग से समन्वय करेगा ताकि प्रशासनिक तैयारियों में कोई कमी न रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में मची उथल-पुथल का असर भारत की घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी राज्यों को कालाबाजारी रोकने और आपातकालीन भंडार सुरक्षित रखने के निर्देश दे सकते हैं। कल शाम की इस बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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