बंगाल चुनाव से पहले मोहम्मद सलीम का बड़ा ऐलान! ३० और ३१ मार्च को पूरे राज्य में वामपंथियों का महा-प्रदर्शन!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ की सरगर्मी के बीच माकपा (CPIM) राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सलीम ने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए और घोषणा की कि लोकतंत्र और ‘मताधिकार’ की रक्षा के लिए आगामी ३० और ३१ मार्च को पूरे बंगाल में वामपंथी उम्मीदवार विरोध प्रदर्शन करेंगे।

चुनाव आयोग पर तीखा हमला: मोहम्मद सलीम ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाएं अब आरएसएस (RSS) के निर्देशों पर काम कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची तैयार करने में भारी गड़बड़ी की गई है। सलीम के अनुसार, “चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का बुरा हाल कर दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आयोग के नोटिसों पर सत्ताधारी दल के प्रभाव की झलक मिलती है। आज देश के संवैधानिक ढांचे को बचाने की सख्त जरूरत है।”

एसआईआर (SIR) और क्षेत्रीय राजनीति: एसआईआर को लेकर भी सलीम ने विस्फोटक बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया धर्म और क्षेत्र के आधार पर भेदभावपूर्ण है। उन्होंने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों को न्याय चाहिए था, उनके लिए अदालत के पास समय नहीं है, जबकि दूसरी ओर बाहरी राज्यों से जजों को लाया जा रहा है।

विधानसभा की विफलता: सलीम ने ममता बनर्जी सरकार और राज्य विधानसभा को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा सर्वदलीय बैठक बुलाने और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। ३० और ३१ मार्च का यह दो दिवसीय आंदोलन बंगाल की जनता को उनके वोट के प्रति जागरूक करने और आयोग की कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के खिलाफ एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


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