शादीशुदा पुरुष का लिव-इन रिलेशनशिप अपराध नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से मचा हड़कंप

क्या सामाजिक नैतिकता और कानून के रास्ते अलग-अलग हैं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक विवादास्पद लेकिन ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि अगर कोई विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे अपराधी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना अदालत का कर्तव्य है, न कि समाज की मान्यताओं के आधार पर फैसला सुनाना।
पूरा मामला: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली अनामिका और नेत्रपाल ने सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी। अनामिका की मां का आरोप था कि नेत्रपाल पहले से शादीशुदा है और उसने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ रखा है। पुलिस ने इस मामले में धारा 87 (BNS) के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि, अदालत ने मां के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि चूंकि दोनों वयस्क हैं और मर्जी से साथ रह रहे हैं, इसलिए यह कोई फौजदारी अपराध नहीं है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि कपल को सुरक्षा दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे। अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी।