पेट्रोल का असली गणित: एक लीटर तेल बेचने पर सरकार की कितनी होती है कमाई? टैक्स न होता तो क्या होता दाम?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग के बीच भारत सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है। कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं। ऐसे में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में 10 रुपये की भारी कटौती की है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके द्वारा चुकाए गए एक लीटर पेट्रोल की कीमत में टैक्स का हिस्सा कितना है?

रिफाइनरी से आपकी टंकी तक का सफर दिल्ली के आंकड़ों पर नजर डालें तो रिफाइनरी से निकलने वाले पेट्रोल की बेस प्राइस करीब 74.97 रुपये होती है। लेकिन इसमें केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी (21.90 रुपये), राज्य सरकार का वैट (15.40 रुपये) और डीलर कमीशन (4.40 रुपये) जुड़ने के बाद यह 94.77 रुपये के पार पहुंच जाता है। यानी तेल की कीमत का एक बड़ा हिस्सा सरकार के खजाने में जाता है।

एक्साइज ड्यूटी में राहत सरकार ने पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये और डीजल पर शून्य कर दिया है। इस कटौती के बाद पेट्रोल पर कुल टैक्स 21.90 रुपये से घटकर 11.90 रुपये रह गया है। हालांकि, यह राहत सीधे तौर पर आम जनता को सस्ती दरों के रूप में नहीं मिलेगी, बल्कि तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए दी गई है ताकि भविष्य में कीमतों में और बढ़ोतरी न हो।

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