“बाहर निकले तो जान से मार देंगे!” बंगाल में चुनावकर्मी पर हमला, क्या निष्पक्ष चुनाव संभव है?

पश्चिम बंगाल के राणाघाट में चुनाव प्रशिक्षण केंद्र के भीतर एक मतदान कर्मी (Polling Officer) पर हुए जानलेवा हमले ने राज्य की चुनावी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ट्रेनिंग के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सरकारी विज्ञापनों के प्रदर्शन का विरोध करने पर एक शिक्षक सह चुनावकर्मी, सैकत चट्टोपाध्याय को बेरहमी से पीटा गया। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य पुलिस और प्रशासन से तत्काल रिपोर्ट तलब की है।
विवाद की जड़: ट्रेनिंग सेंटर में विज्ञापन घटना राणाघाट देवनाथ बॉयज इंस्टीट्यूट हाई स्कूल की है, जहां मतदान कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा था। सैकत चट्टोपाध्याय और उनके साथियों ने आपत्ति जताई कि ट्रेनिंग स्क्रीन पर बार-बार मुख्यमंत्री के सरकारी विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं। उनका तर्क था कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद ऐसा करना अवैध है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध करते ही एक व्यक्ति ने सैकत को धमकी दी कि “ज्यादा बोले तो बाहर निकलते ही मार दिया जाएगा।”
बाहरी लोगों का हमला और हिंसा धमकी के कुछ ही देर बाद, सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए कई बाहरी लोग स्कूल परिसर में घुस आए और सैकत चट्टोपाध्याय पर टूट पड़े। उन्हें इतनी बुरी तरह पीटा गया कि वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। साथी कर्मचारियों ने उन्हें बचाया और प्राथमिक उपचार के लिए ले गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अन्य चुनावकर्मियों में भारी रोष है। वे पूछ रहे हैं कि सुरक्षित माने जाने वाले ट्रेनिंग सेंटर में बाहरी लोग कैसे दाखिल हुए?
आयोग की कार्रवाई और सियासी घमासान घायल सैकत चट्टोपाध्याय ने सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा, “ऐसे माहौल में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है।” चुनाव आयोग ने इस मामले में राज्य के डीजीपी, जिला मजिस्ट्रेट और एसपी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित थाने के आईसी (IC) पर गाज गिर सकती है। भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने इसे ‘तृणमूल का आतंक’ करार देते हुए दोषियों की गिरफ्तारी और बीडीओ को निलंबित करने की मांग की है। हालांकि टीएमसी की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है, लेकिन इस घटना ने बंगाल के चुनावी माहौल को गरमा दिया है।