बंगाल चुनाव 2026: इन 10 सीटों पर हार मतलब TMC का सूपड़ा साफ! क्या दीदी बचा पाएंगी अपना किला?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा अपने चरम पर है। जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) 200 से अधिक सीटें जीतकर वापसी का दावा कर रही है, वहीं भाजपा ने ‘सत्ता परिवर्तन’ का बिगुल फूंक दिया है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि इस बार 10 ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जो तृणमूल का ‘पावर सेंटर’ मानी जाती हैं। अगर इन 10 सीटों पर समीकरण बिगड़े, तो बंगाल में दीदी की सत्ता का अंत निश्चित माना जा रहा है।

प्रमुख सीटों का गणित: सबसे बड़ी नजर भवानीपुर सीट पर है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामना उनके पुराने सिपाही और अब कट्टर विरोधी शुभेंदु अधिकारी से है। जानकारों का कहना है कि अगर ममता अपने ही घर में हारती हैं, तो यह टीएमसी शासन के अंत का सबसे बड़ा संकेत होगा। वहीं बेहला पश्चिम में पार्थ चटर्जी की अनुपस्थिति में रत्ना चटर्जी की प्रतिष्ठा दांव पर है। भाजपा के डॉक्टर इंद्रनील खां यहां कड़ी चुनौती दे रहे हैं।

दक्षिण 24 परगना और हुगली की जंग: डायमंड हार्बर को अभिषेक बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता है। यहां पन्नालाल हलदर और दीपक हलदर के बीच की जंग तय करेगी कि क्या अभिषेक का जादू बरकरार है। सिंगूर, जो ममता के आंदोलन का प्रतीक रहा है, वहां बेचराम मन्ना की हार का मतलब होगा कि राज्य में परिवर्तन की लहर बहुत गहरी है।

अन्य महत्वपूर्ण सीटें: बजबज में 1996 से जीत रहे अशोक देब और हावड़ा मध्य में मंत्री अरूप राय के प्रदर्शन पर सबकी नजरें हैं। नैहाटी, हाबरा, नकाशिपारा और बालीगंज जैसी सीटों पर अगर भाजपा जीत हासिल करती है, तो इसे पूरे बंगाल में ‘भगवा क्रांति’ का आगाज माना जाएगा। कुल मिलाकर, ये 10 सीटें ही तय करेंगी कि 2026 में नबन्ना (सचिवालय) की कुर्सी पर कौन बैठेगा।

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