अमेरिकी सैनिकों पर हमले का बदला! पेंटागन का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’, १० सैनिक घायल होने से भड़का अमेरिका

पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक विनाशकारी मोड़ पर आ गया है। ईरान के साथ बढ़ते टकराव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को कई गुना बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि ३,५०० से अधिक अमेरिकी सैनिकों को तैनात किया गया है, जिनमें से २,५०० मरीन कमांडो ‘यूएसएस त्रिपोली’ (USS Tripoli) युद्धपोत पर सवार होकर ऑपरेशनल क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। पेंटागन अब ईरान की धरती पर ‘बूट्स ऑन ग्राउंड’ यानी जमीनी सेना उतारने की बड़ी तैयारी कर रहा है।
तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब ईरान ने सऊदी अरब स्थित ‘प्रिंस सुल्तान एयर बेस’ पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। इस हमले में कम से कम १० अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिसने आग में घी डालने का काम किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि हालांकि अमेरिका सीधे युद्ध से बचना चाहता है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। ‘यूएसएस त्रिपोली’ की तैनाती ईरान के लिए बड़ी चेतावनी है क्योंकि यह युद्धपोत एफ-३५ स्टेलथ फाइटर जेट्स को संचालित करने में सक्षम है। इसके साथ ही सैन डिएगो से ‘यूएसएस बॉक्सर’ और अन्य नौसैनिक इकाइयां भी रवाना हो चुकी हैं।
२८ फरवरी को शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिकी सेना अब तक ईरान के ११,००० से अधिक ठिकानों को तबाह कर चुकी है। ईरान द्वारा ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ पर नियंत्रण और यमन के हुथी विद्रोहियों द्वारा इजरायल पर किए जा रहे मिसाइल हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और स्वेज नहर की ओर जाने वाले व्यापारिक रास्ते बंद होने के कगार पर हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप वास्तव में ईरान पर जमीनी आक्रमण की अनुमति देंगे।