बैंक लॉकर के नाम पर इंश्योरेंस का खेल! अगर बैंक डाले दबाव तो न हों परेशान, जानें अपना अधिकार

आजकल कई प्राइवेट बैंक ग्राहकों को लॉकर आवंटित करने के बदले जबरन इंश्योरेंस पॉलिसी या निवेश योजनाएं बेच रहे हैं। हाल ही में एक मामला सामने आया जहाँ ग्राहक से लॉकर के लिए 1 लाख रुपये का ULIP खरीदने को कहा गया। जब ग्राहक ने मना किया, तो उसका आवेदन रद्द कर दिया गया। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो जान लें कि यह पूरी तरह से गैरकानूनी है।

क्या है RBI की गाइडलाइंस? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, बैंक लॉकर देने के लिए किसी अन्य वित्तीय उत्पाद को खरीदने का दबाव नहीं डाल सकते। बैंक केवल 3 साल के लॉकर किराए और आकस्मिक स्थिति में लॉकर खोलने के खर्च के बराबर ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ (FD) की मांग कर सकता है। इसके अलावा बीमा, म्यूचुअल फंड या किसी भी तरह का निवेश अनिवार्य करना बैंकिंग नियमों का उल्लंघन है।

शिकायत कहाँ करें? विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहकों को बैंक कर्मियों के इस ‘अघोषित’ दबाव के आगे झुकना नहीं चाहिए। यदि बैंक कर्मचारी दबाव बनाए, तो तुरंत बैंक के ‘नोडल ऑफिसर’ से संपर्क करें। यदि 30 दिनों के भीतर बैंक आपकी समस्या हल नहीं करता है, तो आप ‘RBI Complaint Management System’ पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। याद रखें, लॉकर आपकी सुविधा है, बैंक का सेल्स टूल नहीं।

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