६०० करोड़ का इमरजेंसी फंड! जुलाई-अगस्त में बांग्लादेश शुरू करेगा देशव्यापी टीकाकरण अभियान

बांग्लादेश की राजधानी ढाका सहित देश के कई जिलों में अचानक बच्चों के बीच खसरे (Measles) के मामलों में भारी उछाल देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ‘विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम’ (EPI) के तहत ९ से १५ महीने की उम्र में वैक्सीन लेने के बावजूद बच्चे इस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती है, जिससे निमोनिया और डायरिया जैसे जानलेवा खतरे बढ़ जाते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री सरदार साखावत हुसैन बकुल ने रविवार को एक कार्यक्रम में बताया कि पिछले आठ वर्षों से इस बीमारी के प्रति बरती गई लापरवाही के कारण आज यह स्थिति पैदा हुई है। सरकार ने टीकों के लिए ६०० करोड़ रुपये का नया बजट आवंटित किया है। स्वास्थ्य निदेशालय के उपनिदेशक शहरयार सज्जाद ने बीबीसी को बताया कि वैश्विक गठबंधन ‘गावी’ (Gavi) से २ करोड़ सीरिंज और वैक्सीन मंगवाई गई है, जिसके बाद जुलाई-अगस्त में एक विशेष राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा।
डॉक्टरों का मानना है कि कुपोषण, विटामिन की कमी और समय पर कृमिनाशक दवाएं न मिलना खसरे के बढ़ने के मुख्य कारण हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ३३% संक्रमित बच्चे ९ महीने से कम उम्र के हैं, जबकि टीकाकरण की पहली खुराक ९ महीने के बाद दी जाती है। मार्च महीने में ही खसरे और उससे जुड़ी जटिलताओं के कारण २० से अधिक बच्चों की मौत की खबर सामने आई है। विशेषज्ञ अब टीकाकरण की आयु सीमा को कम करने और टीकों की गुणवत्ता की जांच पर जोर दे रहे हैं।