कोलकाता फुटबॉल में विदेशी खिलाड़ियों का बोलबाला: क्या भारतीय प्रतिभाएं पीछे छूट रही हैं? शुभाशीष और सौविक ने दी अपनी राय

कोलकाता के फुटबॉल मैदानों में विदेशी खिलाड़ियों का प्रभाव अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गया है। मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे दिग्गज क्लबों की वर्तमान संरचना को देखने पर पता चलता है कि जीत की रणनीति अब पूरी तरह से विदेशी पैरों पर निर्भर है। दिमित्री पेट्राटोस और यूसुफ एजेजारी जैसे खिलाड़ियों ने न केवल खेल का स्तर बढ़ाया है, बल्कि भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक नई चुनौती भी पेश की है।
विदेशी सितारों का दबदबा मोहन बागान के लिए दिमित्री पेट्राटोस आक्रमण की जान बन चुके हैं, वहीं अल्बर्टो रोड्रिगेज और टॉम एल्ड्रेड ने रक्षापंक्ति को अभेद्य बना दिया है। कप्तान शुभाशीष बोस का कहना है कि विदेशी खिलाड़ियों के आने से टीम के फिटनेस और अनुभव में सुधार होता है, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि घरेलू खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए पर्याप्त मौके मिलने चाहिए।
दूसरी ओर, ईस्ट बंगाल में साउल क्रेस्पो और मिगुएल फिगुएरा खेल की लय को नियंत्रित कर रहे हैं। अनुभवी खिलाड़ी सौविक चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि विदेशी खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, जो अच्छा है, लेकिन भारतीय फुटबॉल के भविष्य के लिए संतुलन बनाना अनिवार्य है।
चिंता का विषय फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युवा भारतीय खिलाड़ियों को मैच खेलने का समय नहीं मिलेगा, तो इसका सीधा असर राष्ट्रीय टीम पर पड़ेगा। अनुभव के नाम पर विदेशी खिलाड़ियों पर अत्यधिक निर्भरता क्या भारतीय फुटबॉल की जड़ों को कमजोर कर रही है? यह सवाल आज हर फुटबॉल प्रेमी के मन में है।