वोटर लिस्ट विवाद में 200 मौतें! ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को अल्टीमेटम— “लोकतंत्र से खिलवाड़ बंद करो

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ‘वोटर लिस्ट’ को लेकर सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा लगाए गए आरोपों को आगे बढ़ाते हुए अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को एक कड़ा पत्र भेजा है। ममता ने आरोप लगाया है कि भाजपा और चुनाव आयोग का एक हिस्सा मिलकर बंगाल की मतदाता सूची में बाहरी लोगों (यूपी और बिहार) के नाम शामिल करने की बड़ी साजिश रच रहा है।
फॉर्म-6 और बाहरी घुसपैठ का आरोप: ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में दावा किया कि भाजपा एजेंटों के माध्यम से ‘बोरा भर-भर’ कर फॉर्म-6 (नए मतदाता के लिए आवेदन) जमा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महज कुछ ही घंटों के भीतर करीब 30,000 अवैध आवेदन जमा किए गए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, ये लोग बंगाल के निवासी नहीं हैं और इनका राज्य से कोई वैध संबंध नहीं है। उन्होंने इस धांधली को पकड़ने के लिए चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय के CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन: मुख्यमंत्री ने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी के आदेश का हवाला देते हुए आयोग को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि जब शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार मतदाता सूची की न्यायिक समीक्षा चल रही है, तो आयोग किस आधार पर नए आवेदन स्वीकार कर रहा है? उन्होंने आशंका जताई कि बिना राजनीतिक दलों को सूचित किए इन बाहरी लोगों को चुपके से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है।
200 मौतों का गंभीर दावा: ममता बनर्जी ने इस प्रशासनिक प्रक्रिया को ‘अमानवीय’ करार देते हुए एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि दोषपूर्ण ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ और अपने वोटिंग अधिकार खोने के डर से राज्य में अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने आयोग की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग अपनी मर्जी से ऐसे नियम नहीं बना सकता जो 1960 के स्थापित नियमों और संविधान के अनुच्छेद 324 के खिलाफ हों।
ममता ने स्पष्ट किया कि बिहार, हरियाणा और दिल्ली के चुनावों में भी ऐसी ही रणनीतियां अपनाई गई थीं और अब बंगाल में इसे दोहराने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आयोग से इस ‘अवैध’ प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है।