डिजिटल जनगणना 2027 का आगाज़: देश भर में आज से शुरू हुई प्रक्रिया, पश्चिम बंगाल में अब तक अधिसूचना जारी नहीं

ग्यारह साल के अंतराल के बाद, आज 1 अप्रैल से देश की 16वीं जनगणना (Census 2027) का पहला चरण आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। कोविड-19 महामारी के कारण इसमें पांच साल की देरी हुई, लेकिन अब यह पूरी तरह से डिजिटल अवतार में लौट आया है। केंद्र सरकार ने इस चरण के लिए 33 प्रश्नों की एक सूची तैयार की है, जिसके माध्यम से हर भारतीय परिवार की बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक स्थिति का डेटा जुटाया जाएगा।

पश्चिम बंगाल में देरी का कारण: रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जानकारी दी कि देश के बाकी हिस्सों में काम शुरू हो गया है, लेकिन पश्चिम बंगाल ने अभी तक इसके लिए अधिसूचना (Notification) जारी नहीं की है। माना जा रहा है कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की व्यस्तता के कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई है। केंद्र इस मामले में राज्य सरकार के साथ निरंतर संपर्क में है।

33 सवालों में छिपी है देश की तस्वीर: जनगणना के पहले चरण में ‘हाउस लिस्टिंग’ की जाएगी। इसमें नागरिकों से उनके घर की स्थिति, पीने के पानी का स्रोत, बिजली, शौचालय की सुविधा, रसोई गैस का उपयोग, और डिजिटल उपकरणों जैसे स्मार्टफोन या लैपटॉप की उपलब्धता के बारे में पूछा जाएगा। खास बात यह है कि इस बार लोग ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) के जरिए खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।

दूसरे चरण में जाति आधारित गणना और जनसंख्या का मुख्य डेटा एकत्र किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक जनगणना के अधिकांश आंकड़े सार्वजनिक कर दिए जाएं।

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