“अभिषेक की मां ने मुझसे 500 रुपये मांगे थे…” ममता बनर्जी ने पहली बार खोला ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का सबसे बड़ा राज!

पश्चिम बंगाल की सबसे लोकप्रिय योजना ‘लक्ष्मी भंडार’ के पीछे की असली कहानी अब सामने आ गई है। मुर्शिदाबाद के बड़न्या में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुलासा किया कि आखिर क्यों उन्होंने महिलाओं को सीधे वित्तीय सहायता देने का फैसला किया। मुख्यमंत्री ने इस योजना का श्रेय अपनी भाभी और अभिषेक बनर्जी की मां के साथ हुई एक बातचीत को दिया।

नोटबंदी का वो दौर: ममता बनर्जी ने याद करते हुए कहा कि 2016 की नोटबंदी के दौरान जब पुराने नोट बंद हुए, तो घरों में रहने वाली महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। उन्होंने बताया, “नोटबंदी के समय एक दिन अभिषेक की मां मेरे पास दौड़ते हुए आई और पूछा— दीदी, क्या मुझे 500 रुपये मिल सकते हैं? मैंने वजह पूछी तो उसने कहा कि पुराने सारे नोट तो जमा करने होंगे, अब बाजार जाने के लिए पैसे कहां से आएंगे? उस दिन मुझे एहसास हुआ कि हमारी मां-बहनों की छोटी-छोटी बचत छीन ली गई है।”

संकट की पूंजी बनी ‘लक्ष्मी भंडार’: मुख्यमंत्री ने कहा कि उसी दिन उन्होंने ठान लिया था कि वह महिलाओं के लिए कुछ ऐसा करेंगी जिससे उनके हाथ में हमेशा अपना पैसा रहे। आज इस योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को ₹1500 और अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं को ₹1700 प्रति माह दिए जा रहे हैं। ममता ने भावुक होते हुए कहा, “मेरा खुद का भी एक लक्ष्मी भंडार है, जिसमें मैं 5 या 10 रुपये जमा करती हूं और काली पूजा के समय मां को कुछ अर्पण करती हूं।”

सभा में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भले ही दिल्ली ने मनरेगा का पैसा रोक दिया हो, लेकिन राज्य सरकार अपने दम पर विकास करेगी। उन्होंने वादा किया कि आने वाले समय में बंगाल में कोई भी कच्चा घर नहीं रहेगा और हर घर तक नल से जल पहुंचाया जाएगा। ‘लक्ष्मी भंडार’ ने जिस तरह से बंगाल की महिला वोट बैंक को तृणमूल की ओर मोड़ा है, ममता के इस खुलासे ने उस बंधन को और मजबूत कर दिया है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *