‘अगर कोई हाथ लगाए तो चुप मत रहना’, बंगाल की महिलाओं को ममता बनर्जी का बड़ा संदेश!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर तीखे तेवर दिखाए हैं। मुर्शिदाबाद के बरन्या (Buran) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने केंद्रीय बलों (Central Forces) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और महिलाओं को किसी भी ‘अधिग्रहण’ या ‘अपमान’ के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया।
केंद्रीय बलों पर निशाना और महिलाओं को ललकार ममता बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें सूचना मिली है कि आईटीबीपी (ITBP) के महानिदेशक ने कोलकाता दौरे के दौरान महिलाओं की जांच करने का निर्देश दिया है। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्होंने कहा, “मैंने कह दिया है कि बंगाल की महिलाएं अलग हैं। अगर वे आपको हाथ लगाएं या अपमानित करें, तो विरोध करें। अगर वे हमला करें, तो एकजुट होकर उनका मुकाबला करें। टीएमसी सिर झुकाना नहीं, बल्कि लड़कर अपना हक छीनना जानती है।”
लक्ष्मी भंडार और नोटबंदी का कनेक्शन रैली के दौरान ममता ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के पीछे की कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि 2016 की नोटबंदी के दौरान उन्होंने लोगों की बेबसी देखी थी। ममता के अनुसार, “नोटबंदी के समय अभिषेक (बनर्जी) की मां मेरे पास आईं और बाजार के लिए 500 रुपये मांगे। एक अन्य लड़की ने भी 200 रुपये की मदद मांगी थी क्योंकि पुराने नोट बेकार हो चुके थे। माताओं-बहनों की बचत छीन ली गई थी, इसलिए मैंने तय किया कि उनके हाथ में हमेशा कुछ पैसे होने चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि वह खुद एक गुल्लक में पैसे जमा करती हैं जिसे वह काली पूजा में खर्च करती हैं।
भाजपा का पलटवार भाजपा ने ममता बनर्जी के इस बयान को ‘भड़काऊ’ करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता देवजीत सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री लोगों को संविधान के खिलाफ जाने के लिए उकसा रही हैं और हिंसा फैला रही हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। चुनाव से ठीक पहले ममता का यह रुख बंगाल की राजनीति में गरमाहट ले आया है।