मालदा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट का रौद्र रूप! ‘प्रशासन फेल है’, जजों को बंधक बनाने पर मुख्य न्यायाधीश ने लगाई कड़ी फटकार

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना ने अब देश की सर्वोच्च अदालत को हिला कर रख दिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने इस मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए राज्य प्रशासन को ‘पूरी तरह विफल’ करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायिक अधिकारियों को डराने और उनका मनोबल तोड़ने के लिए यह हमला जानबूझकर किया गया था।

घटना बुधवार दोपहर की है, जब कालियाचक ब्लॉक-2 के बीडीओ कार्यालय में मतदाता सूची के सत्यापन के लिए आए 7 न्यायाधीशों और चुनाव आयोग के अधिकारियों को हिंसक भीड़ ने घेर लिया। प्रदर्शनकारी एसआईआर (SIR) का विरोध कर रहे थे और उनका दावा था कि जब तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आश्वासन नहीं मिलता, वे अधिकारियों को नहीं छोड़ेंगे। मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा, “मैं राजनीति नहीं करना चाहता, लेकिन मैंने खुद रात 2 बजे तक इस मामले की रिपोर्ट ली है। अगर यह आंदोलन गैर-राजनीतिक था, तो वहां राजनेता क्या कर रहे थे? वहां छोटे बच्चे भी थे, क्या उन्हें पानी और बिस्कुट तक नहीं दिया गया?”

मामला इतना गंभीर हो गया था कि मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को राज्य के डीजीपी से बात करनी पड़ी। भारी पुलिस बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मदद से आधी रात को इन अधिकारियों को सुरक्षित निकाला जा सका। इस हंगामे के कारण नेशनल हाईवे-12 पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे उत्तर और दक्षिण बंगाल का संपर्क टूट गया।

पुलिस ने अब तक इस मामले में 10 मुकदमे दर्ज किए हैं, जिनमें से कई स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेकर दर्ज किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना की जांच सीबीआई या एनआईए को सौंपने का संकेत दिया है, जिससे ममता सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब न्यायिक अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा? 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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