अंतरिक्ष में रचा गया इतिहास: 52 साल बाद चंद्रमा की ओर रवाना हुआ नासा का आर्टेमिस-2, जानें कैसा होगा अंतरिक्ष यात्रियों का जीवन

मानव जाति ने एक बार फिर चंद्रमा की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। नासा का शक्तिशाली ‘ओरियन’ अंतरिक्ष यान चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है। 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद यह पहली बार है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) को पार कर चंद्रमा की गहराई में जा रहा है।

ऐतिहासिक क्रू और मिशन: इस मिशन का नेतृत्व रीड वाइजमैन कर रहे हैं। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, और मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि विक्टर ग्लोवर चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति और क्रिस्टीना कोच पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बन गई हैं।

कैसी होगी ‘ओरियन’ के अंदर की जिंदगी? अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यह 10 दिन किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं होंगे। ओरियन यान का अंदरूनी हिस्सा महज एक ‘मारुति ओमनी’ वैन जितना छोटा है। इसी 330 वर्ग फुट की जगह में चारों यात्रियों को सोना, खाना और काम करना है। यहाँ नहाने की कोई सुविधा नहीं है; शरीर साफ करने के लिए उन्हें गीले टिश्यू और बिना पानी वाले शैम्पू का सहारा लेना होगा।

भोजन के लिए नासा ने 189 प्रकार के व्यंजन भेजे हैं, जिनमें चीज़ मैकरोनी और केक शामिल हैं, लेकिन सब कुछ पैकेट बंद है। वजनहीनता के कारण हड्डियों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए हर यात्री को रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करना अनिवार्य है।

खतरे और वापसी: मिशन के छठे दिन ओरियन चंद्रमा के उस हिस्से के पीछे होगा जो पृथ्वी से कभी नहीं दिखता। उस दौरान करीब 50 मिनट तक पृथ्वी से संपर्क पूरी तरह कट जाएगा। यह मिशन चंद्रमा पर उतरने के लिए नहीं, बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाकर वापस आने के लिए है। सौर विकिरण (Solar Radiation) और तकनीकी गड़बड़ी इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। अंत में, यान 11 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और प्रशांत महासागर में लैंड करेगा। यह मिशन भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव भेजने की नींव रखेगा।

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