मालदा में जजों को बंधक बनाने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट! CBI जांच के आदेश, बंगाल के मुख्य सचिव और DGP को कारण बताओ नोटिस

पश्चिम बंगाल के मालदा (कालियाचक) में मतदाता सूची संशोधन कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को भीड़ द्वारा बंधक बनाने और उनके साथ दुर्व्यवहार की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सीबीआई (CBI) जांच का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और एसपी को अवमानना का नोटिस जारी करते हुए ६ अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बंगाल सरकार के एडवोकेट जनरल को फटकार लगाते हुए कहा, “आपके राज्य में हर चीज पर राजनीति होती है, यहां तक कि अदालत के आदेशों पर भी। न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी थी, जिसमें वह पूरी तरह विफल रहा।” न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक महिला जज के ५ साल के मासूम बच्चे को घंटों तक बिना पानी और भोजन के बंधक बनाकर रखा गया, जो बेहद शर्मनाक है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना ने हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे भाजपा की ‘गेमप्लान’ बताते हुए राज्य को बदनाम करने की साजिश करार दिया है, जबकि भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने इसके लिए टीएमसी की उकसावे वाली राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक कार्यों में इस तरह की बाधा और कानून-व्यवस्था की विफलता के कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की संभावना भी बढ़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अब ७०० न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया है।

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