शुभेंदु अधिकारी का नामांकन रद्द करने की मांग! भवानीपुर और नंदीग्राम में मचा भारी सियासी घमासान!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के लिए बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही राज्य की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, जो इस बार नंदीग्राम के साथ-साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर से भी चुनाव लड़ रहे हैं, अब बड़ी मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शुभेंदु का नामांकन रद्द करने की मांग की है।

डराने-धमकाने और कश्मीर से तुलना का आरोप टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग को भेजे गए पहले पत्र में आरोप लगाया है कि शुभेंदु अधिकारी केंद्रीय बलों का दुरुपयोग कर आम जनता के बीच डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि शुभेंदु बंगाल में ‘कश्मीर जैसी स्थिति’ पैदा करने की धमकी दे रहे हैं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सीधे तौर पर निशाना बना रहे हैं। टीएमसी का मानना है कि यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक दंडनीय अपराध है और इसके लिए शुभेंदु को चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए।

नामांकन के दौरान नियमों की अनदेखी दूसरा आरोप शुभेंदु के भवानीपुर नामांकन से जुड़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में पर्चा दाखिल करने पहुंचे शुभेंदु पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग की ‘५ व्यक्ति’ वाली सीमा का उल्लंघन किया है। टीएमसी ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया कि रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे में निर्धारित संख्या से कहीं अधिक लोग मौजूद थे, जो कि स्पष्ट रूप से चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल डेरेक ओ’ब्रायन ने इस मामले में चुनाव पर्यवेक्षकों और रिटर्निंग ऑफिसर की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने नियम टूटते देख भी कोई कार्रवाई नहीं की। टीएमसी ने मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई जाए और नियमों की अनदेखी के आधार पर शुभेंदु अधिकारी की उम्मीदवारी तुरंत खारिज की जाए। चुनाव से पहले इस तीखे आरोप-प्रत्यारोप ने बंगाल के राजनीतिक रण को और भी रोमांचक बना दिया है।

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