मिशन आर्टेमिस २! ६ मिनट के उस ‘बर्न’ ने कैसे बदल दी अंतरिक्ष विज्ञान की किस्मत?

मानवता के लिए एक और विशाल छलांग! नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) के आर्टेमिस २ मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने आखिरकार पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी है और चंद्रमा की ओर अपना ऐतिहासिक सफर शुरू कर दिया है। शुक्रवार को ओरियन अंतरिक्ष यान ने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को सफलतापूर्वक पार कर लिया, जो गहरे अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। १९७२ के अपोलो १७ मिशन के बाद यह पहली बार है जब मानव युक्त कोई यान चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है।
नासा के अनुसार, ओरियन यान ने ‘ट्रान्सलूनर इंजेक्शन बर्न’ (Trans-lunar Injection Burn) की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके लिए यान के मुख्य इंजन को लगभग ५ मिनट ४९ सेकंड तक चलाया गया, जिससे ६,००० पाउंड का जबरदस्त थ्रस्ट पैदा हुआ। इसी ऊर्जा ने यान को पृथ्वी की कक्षा से बाहर धकेल कर चंद्रमा की सटीक दिशा में डाल दिया। नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस सफलता की पुष्टि करते हुए कहा, “आर्टेमिस २ के यात्री आधिकारिक तौर पर चंद्रमा के रास्ते पर हैं। अमेरिका एक बार फिर इस खेल में वापस आ गया है, और इस बार हम पहले से कहीं अधिक दूर जाने के लिए तैयार हैं।”
इस मिशन की कमान नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन के हाथों में है। अंतरिक्ष में उनका पहला दिन व्यायाम और तकनीकी प्रणालियों की जांच के साथ शुरू हुआ। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होने के बाद, यह दल अब चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएगा और विभिन्न प्रणालियों का परीक्षण करेगा। लगभग १० दिनों के इस रोमांचक सफर के बाद, ये चारों नायक प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग के साथ पृथ्वी पर लौटेंगे। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव बस्ती बसाने और मंगल ग्रह तक पहुँचने के सपने को हकीकत में बदलने की पहली सीढ़ी है।