चुनाव से पहले महा-हड़कंप! वोटर लिस्ट से 17 लाख नाम गायब, क्या आपका वोट है सुरक्षित?

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले मतदाता सूची (Voter List) को लेकर एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, पहले चरण के लिए ‘एडजुडिकेशन’ के दायरे में आए 36 लाख नामों में से लगभग 45 प्रतिशत, यानी करीब 17 लाख नाम सूची से हटा दिए गए हैं। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम कटना प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

सबसे बड़ा सवाल उन मतदाताओं के भविष्य पर है जिनके नाम काटे गए हैं। 6 अप्रैल नामांकन की आखिरी तारीख है और इसी दिन 152 विधानसभा क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। अब सवाल यह है कि क्या ये 17 लाख लोग महज दो दिनों के भीतर दोबारा आवेदन कर अपना नाम जुड़वा पाएंगे? नियमों के मुताबिक, जिन लोगों के नाम कटे हैं उन्हें ट्रिब्यूनल में अपील करनी होती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक ट्रिब्यूनल का गठन ही नहीं हुआ है और न ही काम शुरू हुआ है। ऐसे में अपील और समाधान की प्रक्रिया फिलहाल अधर में लटकी हुई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सोमवार को 152 सीटों के लिए चार सप्लीमेंट्री लिस्ट और एक सब-सप्लीमेंट्री लिस्ट 4(ए) जारी की है। आयोग के अनुसार, 6 अप्रैल को फाइनल लिस्ट पर मुहर लग जाएगी। लेकिन ट्रिब्यूनल की अनुपस्थिति में मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार के लिए कहां गुहार लगाएं, यह बड़ा सवाल है। 17 लाख लोगों का मतदान प्रक्रिया से बाहर होना चुनाव की पारदर्शिता और समावेशिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक दलों में इस भारी ‘नाम कटौती’ को लेकर बेचैनी बढ़ गई है।

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