उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग! धामी सरकार का बड़ा फैसला, 250 से ज्यादा अवैध मदरसों पर जड़ा ताला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने ‘इस्लामिक मदरसा शिक्षा बोर्ड’ को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसकी जगह अब ‘उत्तराखंड स्टेट माइनॉरिटी एजुकेशन अथॉरिटी’ (Uttarakhand State Minority Education Authority) काम करेगी, जो राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को एक नए ढांचे में लाएगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में 250 से अधिक अवैध मदरसों को बंद कर दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि इन संस्थानों के पास वैध दस्तावेज नहीं थे। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए यह कदम जरूरी था। अब इन मदरसों को आधुनिक स्कूलों में बदला जाएगा, जहां गणित, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

नए नियमों के मुताबिक, जुलाई 2026 से सभी पंजीकृत मदरसे और अल्पसंख्यक संस्थान राज्य शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत आएंगे। धार्मिक शिक्षा अब केवल नियमित स्कूल समय के बाद ही दी जा सकेगी। जहां एक ओर सरकार इसे ‘ऐतिहासिक सुधार’ बता रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों छात्रों और शिक्षकों के भविष्य को लेकर कुछ हलकों में चिंता भी जताई जा रही है। हालांकि, सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और छात्र बेहतर करियर बना सकेंगे।

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