मालदा हिंसा पर NIA का बड़ा एक्शन! जजों को बंधक बनाने के मामले में दिल्ली से पहुंची स्पेशल टीम

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक-२ ब्लॉक में सात न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक बंधक बनाए जाने की घटना ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में ‘प्रारंभिक जांच’ (Preliminary Enquiry) दर्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को हुई इस हिंसा में महिला जजों समेत अधिकारियों को आधी रात तक कार्यालय में कैद रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: शीर्ष अदालत ने इस हमले को “नियोजित और जानबूझकर” किया गया कृत्य बताया है। कोर्ट का मानना है कि न्यायिक अधिकारियों का मनोबल तोड़ने और उनके काम में बाधा डालने के लिए यह भीड़ जुटाई गई थी। अदालत के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने गुरुवार देर रात एनआईए महानिदेशक को जांच के निर्देश दिए, जिसके बाद कोलकाता से एक विशेष टीम मालदा के लिए रवाना हो गई।
DIG रैंक के अधिकारी करेंगे नेतृत्व: सूत्रों के अनुसार, इस जांच दल का नेतृत्व डीआईजी (DIG) रैंक के एक अधिकारी कर रहे हैं, जबकि पूरी निगरानी आईजी (IG) स्तर के अधिकारी द्वारा की जा रही है। एनआईए की टीम मालदा पहुंचकर स्थानीय पुलिस से केस डायरी और सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में लेगी। अब तक इस मामले में २० लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मुख्य आरोपियों पर शिकंजा: गिरफ्तार लोगों में मोथाबाड़ी से इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और इस घटना के मुख्य साजिशकर्ता माने जा रहे वकील मोफाक्कुरुल इस्लाम शामिल हैं। शाहजहां अली सहित १८ आरोपियों को पहले ही १० दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, बागडोगरा एयरपोर्ट से भागने की कोशिश करते समय पकड़े गए वकील मोफाक्कुरुल से भी एनआईए पूछताछ कर सकती है।
इस घटना ने बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष जहां राज्य सरकार को घेर रहा है, वहीं एनआईए यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या इस भारी भीड़ के पीछे कोई संगठित गिरोह या बड़ी साजिश काम कर रही थी। फिलहाल कालियाचक में भारी सुरक्षा बल तैनात है।