पाकिस्तान में हाहाकार! डीजल ५२० रुपये के पार, एक बोरी आटे की कीमत हुई ২০০০ रुपये

ईरान युद्ध ने वैश्विक ईंधन संकट तो पैदा किया ही है, लेकिन पाकिस्तान में इसका असर किसी कयामत से कम नहीं है। जहां दुनिया युद्ध के रणनीतिक पहलुओं पर चर्चा कर रही है, वहीं पाकिस्तान की आवाम दाने-दाने को तरस रही है। पाकिस्तानी सरकार ने जनता को राहत देने के बजाय उन पर टैक्स का बोझ और बढ़ा दिया है। सब्सिडी में कटौती और सेवाओं में कमी के कारण वहां ईंधन, बिजली और खाद्य पदार्थों की कीमतें बेकाबू हो चुकी हैं।

ईंधन की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल कुछ ही हफ्तों के भीतर ईंधन की कीमतों में ২০ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई थी, लेकिन अब डीजल की कीमत ৫৪.৯% बढ़कर ৫২০.৩৫ पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल भी ৪২.৭% की छलांग लगाकर ৪৫৮.৪০ रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। माल ढुलाई महंगी होने के कारण जरूरी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। जनवरी में जो मुद्रास्फीति ৫.৮ प्रतिशत थी, वह अब ৭.৩ प्रतिशत पर पहुंच गई है।

गैस और बिजली का संकट ईंधन के साथ-साथ गैस की किल्लत भी बढ़ गई है। एलपीजी सिलेंडर की कीमत एक महीने में ९०० रुपये बढ़कर ৩,৫०० रुपये तक पहुंच गई है। बिजली की कीमतें पहले ही एशिया में सबसे ज्यादा थीं, और अब ২০২৬ के बिलों के लिए प्रति यूनिट १.৬২ रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी की गई है। इसके कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है।

महंगा हुआ कर्ज और भोजन महंगाई का आलम यह है कि २० किलो आटे की बोरी ২০০০ रुपये में मिल रही है। दालों की कीमत ৪৫০ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने ब्याज दर बढ़ाकर ১০.৫ प्रतिशत कर दी है, जिससे होम लोन और बिजनेस लोन लेना और भी महंगा हो गया है। जनता को राहत देने के बजाय सरकार आईएमएफ से कर्ज लेने के लिए लोगों पर टैक्स का बोझ लाद रही है और सब्सिडी खत्म कर रही है।

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