धान छोड़ गन्ने की खेती से किसान हुए मालामाल! पूर्व मेदिनीपुर में हो रही है ‘मीठी’ चांदी

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के एगरा अंतर्गत महाविश्रा इलाके के किसानों की किस्मत अब गन्ने की खेती से चमक रही है। पारंपरिक धान की खेती के बजाय यहाँ के किसान अब बड़े पैमाने पर गन्ने की पैदावार कर रहे हैं और इससे उन्हें जबरदस्त मुनाफा हो रहा है। इलाके की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु ने गन्ने की खेती को एक लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया है, जिससे किसानों की रुचि इस ओर तेजी से बढ़ी है।
खेती की तकनीक और लागत: गन्ने की बुवाई के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह जुताई की जाती है और उसमें जैविक व रासायनिक खाद का संतुलन बनाया जाता है। आमतौर पर जनवरी से मार्च के बीच गन्ने के तने (सेट्स) लगाए जाते हैं। प्रत्येक सेट में २-३ गांठें होना अनिवार्य है। नियमित सिंचाई और निराई-गुड़ाई इस फसल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बीघे जमीन पर बीज, खाद और मजदूरी मिलाकर लगभग ২৫ से ৩০ हजार रुपये का खर्च आता है।
मुनाफे का शानदार गणित: गन्ने की फसल को तैयार होने में ১০ से ১২ महीने का समय लगता है। एक बीघे जमीन से लगभग ২০০ से ৩০০ क्विंटल तक गन्ने की पैदावार होती है। यदि बाजार भाव अच्छा रहे, तो लागत निकालने के बाद किसान को भारी बचत होती है। यही वजह है कि एगरा के किसान अब धान की खेती कम कर गन्ने की ओर रुख कर रहे हैं। स्थानीय मंडियों और चीनी मिलों में इस गन्ने की भारी मांग है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है।