कुड़मी समाज के हक के लिए अभिषेक बनर्जी का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप

पश्चिम बंगाल के जंगलमहल इलाके में कुड़मी समुदाय के विकास और उनके अधिकारों को लेकर राजनीति तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने कुड़मी समाज को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा है कि राज्य सरकार उनके भाषाई और सांस्कृतिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “राज्य सरकार कुड़मी समाज के साथ हमेशा खड़ी रही है और उनके विकास के लिए हर संभव कदम उठाएगी।”

अमित शाह को भेजा गया पत्र: राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक औपचारिक पत्र भेजकर कुड़मी भाषा को विशेष दर्जा और मान्यता देने की मांग की है। यह पत्र उस समय भेजा गया है जब हाल ही में कुड़मी नेता अजीत महतो ने अमित शाह के साथ बैठक की थी। पत्र में मांग की गई है कि कुड़मी समुदाय की भाषा, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व दिया जाए।

केंद्र की चुप्पी पर सवाल: अभिषेक बनर्जी और राज्य सरकार के प्रयासों के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक कुड़मी भाषा को वैध मान्यता प्रदान नहीं की है। टीएमसी का आरोप है कि केंद्र इस मुद्दे पर टालमटोल कर रहा है। कुड़मी समुदाय में भी इस बात को लेकर नाराजगी है कि जहां राज्य सरकार सक्रियता दिखा रही है, वहीं केंद्र की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

चुनावी समीकरण और कुड़मी वोट: राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कुड़मी मुद्दा केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा ‘वोट बैंक’ मुद्दा भी है। जंगलमहल की सीटों पर कुड़मी मतदाताओं का अच्छा प्रभाव है। ऐसे में अभिषेक बनर्जी द्वारा कुड़मी समाज के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना, बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस पत्र और कुड़मी समाज की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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