ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच सोना हुआ सस्ता, क्या निवेश के लिए चांदी है असली ‘सुपरहीरो’?

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय बाजारों में सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। आम तौर पर जब भी युद्ध की स्थिति बनती है, शेयर बाजार धराशायी हो जाता है और लोग सोने को सबसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) मानते हैं। लेकिन इस बार बाजी पलटती दिख रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समय सोने के बजाय चांदी (Silver Investment) में पैसा लगाना भविष्य के लिए जैकपॉट साबित हो सकता है।

क्या है गोल्ड-सिल्वर रेशियो का गणित? निवेश करने से पहले ‘गोल्ड-सिल्वर रेशियो’ को समझना जरूरी है। यह रेशियो बताता है कि एक निश्चित मात्रा में सोना खरीदने के लिए आपको कितनी चांदी की जरूरत होगी। वर्तमान में यह अनुपात ६० के स्तर पर है। जानकारों के अनुसार, जब यह रेशियो बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि सोने की तुलना में चांदी काफी सस्ती मिल रही है। ऐतिहासिक रूप से यह अनुपात ४० से ७० के बीच रहता है, जिससे स्पष्ट है कि अभी चांदी में निवेश का सही समय है।

चांदी क्यों है बेहतर विकल्प? सोने का उपयोग मुख्य रूप से गहनों या बैंक लोन के लिए होता है, लेकिन चांदी की मांग इंडस्ट्री (Industrial Demand) में बहुत ज्यादा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से लगभग ४४ प्रतिशत तक नीचे गिर चुकी है। ऐसे में जब बाजार की साइकिल घूमेगी, तो चांदी सोने से कहीं ज्यादा तेज रिटर्न दे सकती है।

सावधानी और संभावनाएं: हालांकि सोना हमेशा एक सुरक्षित दांव होता है क्योंकि केंद्रीय बैंक भी संकट के समय सोना खरीदते हैं। डॉलर की मजबूती और प्रॉफिट बुकिंग के कारण सोने के दाम भले ही गिर रहे हों, लेकिन चांदी की अपनी अलग रफ्तार है। चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, लेकिन औद्योगिक मांग इसे भविष्य का घोड़ा बनाती है। एक्सपर्ट्स की मानें तो भविष्य के मुनाफे के लिए चांदी अभी सबसे आकर्षक स्तर पर है।

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